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शिवांगी सक्सेना का कहना है कि उन्होंने ‘बिना किसी शुल्क’ के खादी लाउंज डिजाइन करने में मदद की थी.

7 जनवरी, 2017 को खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के तत्कालीन अध्यक्ष और वर्तमान में दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना मुंबई में देश के पहले एक्सक्लूसिव खादी इंडिया लाउंज के लॉन्च में व्यस्त थे. 2015 में केवीआईसी के चेयरमैन बने सक्सेना के बारे में रिपोर्ट करते हुए मीडिया ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर पेश किया, जिसने खादी को एक वैश्विक ब्रांड बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनके रिज्यूमे में भी उनका वर्णन एक ऐसे शख़्स के तौर पर किया गया है, जो कई नई तकनीक लेकर आए और जिसने कई नई परियोजनाओं को लागू किया.

इस सबसे केवीआईसी में 248% का इजाफा हुआ, 40 लाख रोजगार सृजित हुए और वित्तीय वर्ष 2021-2022 में 1.15 लाख करोड़ का ऐतिहासिक कारोबार संभव हुआ.

अपने करियर की शुरुआत में सक्सेना ने संयुक्त राष्ट्र के पुरस्कार समेत कई अन्य पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं. हालांकि बतौर केवीआईसी चेयरमैन उनके साथ कुछ ऐसे काम भी जुड़े जिनका जिक्र उनके रिज्यूमे में नहीं है. यह बहुत दिलचस्प है कि मुंबई स्थित प्रीमियम खादी इंडिया लाउंज उस 80 करोड़ रुपये के अनुदान का एक हिस्सा है, जिसे खादी को एक फैशन गारमेंट के रूप में स्थापित करने के लिये जारी किया गया था. इस खादी लाउंज को इंटीरियर डिजाइनर शिवांगी सक्सेना के सहयोग से डिजाइन किया गया. इस बाबत एक शिलापट्ट भी लगा है जिस पर शिवांगी सक्सेना का नाम लिखा है. ये शिवांगी सक्सेना, दिल्ली के मौजूदा एलजी विनय कुमार सक्सेना की पुत्री हैं.

जब शिवांगी सक्सेना से इसके बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “बतौर एक नवोदित डिजाइनर मैंने ब्रेन स्टॉर्मिंग एक्ससरसाइज के एक हिस्से की तरह ही आउटलेट को डिजाइन करने की संकल्पना में सुझाव दिया. मेरा योगदान सिर्फ डिजाइन तक ही सीमित था. मैं किसी भी तरह के निर्माण कार्य का हिस्सा नहीं थी. यह पूरी तरह से ‘निशुल्क आधार’ पर किया था. केवीआईसी कार्यालय से इस बात की पुष्टि की जा सकती है.”




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