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अडानी एंटरप्राइजेज की मीडिया विंग अगले दो दिनों में एनडीटीवी के लगभग 30 प्रतिशत शेयरों का अधिग्रहण करेगी. घोषणा के मुताबिक एनडीटीवी के 26 प्रतिशत अतिरिक्त शेयरों के अधिग्रहण का भी प्रस्ताव है.

एएमजी मीडिया नेटवर्क्स के सीईओ संजय पुगलिया ने मंगलवार को एक बयान में कहा, “समाचार जगत में अग्रणी एनडीटीवी विविध क्षेत्रों और स्थानों पर सशक्त पहुंच रखता है. अतः, यह हमारी कल्पना को साकार करने के लिए सबसे उपयुक्त प्रसारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म है. हम समाचार वितरण में एनडीटीवी के नेतृत्व को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं.”

अडानी एंटरप्राइजेज ने घोषणा की कि चूंकि वीसीपीएल के पास आरआरपीआर के शेयर वारंट हैं, इसलिए उसने मंगलवार को ‘वारंट एक्सरसाइज नोटिस’ जारी करके, आरआरपीआर के 1,990,000 वारंट्स को 1,990,000 इक्विटी शेयरों में बदलने के अपने अधिकार का प्रयोग किया है. यह आरआरपीआर की इक्विटी शेयर पूंजी का 99.5% है.

“वीसीपीएल किसी भी समय अपने विवेकाधिकार का प्रयोग निम्न के लिए कर सकता है: (i) आरआरपीआर की इक्विटी शेयर पूंजी का 99.99% तक अधिग्रहण करने के लिए वारंट्स का प्रयोग; और (ii) श्री प्रणय रॉय और श्रीमती राधिका रॉय द्वारा धारित आरआरपीआर के सभी मौजूदा इक्विटी शेयरों को खरीदने और आरआरपीआर की इक्विटी शेयर पूंजी का 100% प्राप्त करने के लिए पर्चेस ऑप्शन का प्रयोग.”

आरआरपीआर को अपने 99.50 प्रतिशत शेयर वीसीपीएल को दो कार्य दिवसों के भीतर आवंटित करने होंगे, जिसके बाद एएमजी मीडिया नेटवर्क एनडीटीवी के 29.18 प्रतिशत शेयरों का मालिक बन जाएगा. इसके अलावा बाजार के नियमों के अनुसार एएमजी मीडिया नेटवर्क ने 26 प्रतिशत अतिरिक्त शेयरों को खरीदने के लिए एनडीटीवी के आम शेयरधारकों को खुला ऑफर दिया है. अडानी ग्रुप ने प्रति शेयर 294 रुपए देने की पेशकश की है.

एनडीटीवी के स्वतंत्र शेयरधदारकों की संख्या 29,691 है. इन लोगों ने दो लाख या उससे कम का निवेश कंपनी में कर रखा है. ये आम शेयरधारक कंपनी की 23.85 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं.

मंगलवार को सौदे की घोषणा से पहले एनडीटीवी के शेयर 376.55 रुपए पर बंद हुए. हालांकि रॉय दंपत्ति के पास अभी भी एनडीटीवी के लगभग 32 प्रतिशत शेयर हैं, जो कि वीसीपीएल के माध्यम से अडानी को मिले हिस्से से अधिक हैं. लेकिन अगर अडानी ग्रुप अपने ऑफर के जरिए आम शेयरधारकों से 26 अतिरिक्त शेयर खरीदने में सफल रहता है तो कंपनी का नियंत्रण अडानी समूह के हाथ में जा सकता है.

पिछले कुछ महीनों के दरम्यान मीडिया क्षेत्र में एएमजी मीडिया नेटवर्क्स का यह दूसरा बड़ा निवेश है. मई में इसने एक अज्ञात राशि का भुगतान करके पत्रकार राघव बहल की क्विंटिलियन बिजनेस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी.

लेकिन एनडीटीवी का स्वामित्व बदलने से से टीवी समाचार मीडिया में एक आमूल-चूल परिवर्तन हो सकता है. भले ही एनडीटीवी रिपब्लिक, टाइम्स नाउ या इंडिया टुडे टीवी जितना न देखा जाता हो, लेकिन इसे उन चंद बचे-खुचे मीडिया प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है जो स्वतंत्र रूप से सरकार के आलोचक हैं. इसका स्वामित्व नरेंद्र मोदी के एक बेहद करीबी के पास जाने से टीवी पर अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध समाचारों की विविधता पर गहरा असर पड़ेगा.




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